उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण घोटाले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच में होगी। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 14 में सीरियल नंबर 19 पर निर्धारित है।
आरक्षण घोटाले का आरोप
इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग 19,000 सीटों पर आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। ओबीसी वर्ग को मिलने वाला 27% आरक्षण घटाकर मात्र 3.86% कर दिया गया, जबकि एससी वर्ग को 21% के बजाय सिर्फ 16.2% आरक्षण दिया गया। यह भर्ती प्रक्रिया बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 के प्रावधानों के विपरीत बताई जा रही है।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
इस मामले में लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरी भर्ती सूची को आरक्षण नियमों के उल्लंघन के आधार पर रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पीड़ित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अभ्यर्थियों की मांग: सरकार करे याची लाभ का प्रस्ताव
आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से ही न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ (Litigant Benefit) का प्रस्ताव पेश कर मामले का निपटारा करना चाहिए ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
न्याय की आस में पीड़ित अभ्यर्थी
आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। वे लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को सुधारकर उन्हें न्याय दिया जाए। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय देता है और पीड़ित अभ्यर्थियों को राहत मिलती है या नहीं।