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8 Year Vs Questions: योगी सरकार की रिपोर्ट कार्ड पर अखिलेश यादव का तंज

After losing seats in general elections, BJP eyes 9 assembly seats of UP in by-elections

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने शासन के आठ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर सरकार द्वारा प्रदेशभर में Report Card और Vikas Utsav के माध्यम से उपलब्धियों को जनता के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मौके पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर कटाक्ष किया है।

अखिलेश यादव का ट्वीट बना चर्चा का विषय

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा – “आठ साल, यूपी बर्बाद और सवाल ही सवाल।” इस बयान के साथ उन्होंने सरकार के कामकाज पर कई सवाल खड़े किए और संकेत दिया कि मौजूदा सरकार केवल प्रचार में व्यस्त रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।

सीएम योगी का पलटवार: बदलाव साफ दिखाई दे रहा है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की 8 साल की यात्रा को “सेवा, सुरक्षा और सुशासन” की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि आज से आठ साल पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता, दंगे, किसानों की आत्महत्या और युवाओं में पहचान का संकट जैसे हालात थे। लेकिन केवल सरकार बदलने से तंत्र और समाज में जो व्यापक परिवर्तन हुआ है, उसे हर व्यक्ति महसूस कर सकता है। उन्होंने 25 करोड़ जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के चलते ही यह परिवर्तन संभव हुआ।

बीजेपी नेताओं ने गिनाईं उपलब्धियाँ

राज्य सरकार के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि बीते आठ वर्षों में जो कार्य किए गए हैं, उन्हें आम जनता तक पहुँचाने के लिए प्रत्येक ज़िले में कार्यक्रम हो रहे हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि कानून-व्यवस्था के मामले में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 पर है और औद्योगिक निवेश के मामले में भी प्रदेश अग्रणी है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण और जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने समाजवादी पार्टी को पूरी तरह नकार दिया है।

राजनीतिक टकराव का नया दौर

जहां एक ओर भाजपा सरकार अपनी development narrative और law & order model को जनता के सामने रख रही है, वहीं विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, सरकार के दावों को खोखला बता रही है। ऐसे में देखा जा सकता है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कोई भी पार्टी किसी भी रूप में ढील नहीं देना चाहती और इसी के चलते तंज कसकर अपने प्रभुत्व को लोगों के सामने रखने का प्रयास करती हैं।

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