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महाकुंभ से लौटते श्रद्धालुओं का रेला काशी में उमड़ पड़ा है। 12 फरवरी को लगभग 50 लाख श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे, जो अब तक का ऐतिहासिक आंकड़ा है। शहर की सड़कें, घाट और प्रमुख मंदिर श्रद्धालुओं से खचाखच भरे हुए हैं।
माघी पूर्णिमा के स्नान के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। गंगा घाटों पर उमड़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। घाटों पर अधिक भीड़ न जमा हो, इसे ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी तक सभी आरती कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है।
वाराणसी स्थित सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब 'अक्षर पुरुषोत्तम दर्शनम' का पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह कोर्स स्वामी नारायण संप्रदाय और विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देना और इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करना है।
महाकुंभ और मौनी अमावस्या के अवसर पर वाराणसी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सड़कों पर उतरे।
काशी विश्वनाथ मंदिर में इस बार महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए करीब 11 लाख भक्त पहुंचे, जिससे अब तक के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं।
महाकुंभ 2025 के दौरान काशी में श्रद्धालुओं का पलट प्रवाह देखने को मिल रहा है। रेलवे स्टेशनों, गंगा घाटों और शहर की सड़कों पर भक्तों का हुजूम उमड़ा हुआ है। मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं।
महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को ठंड से बचाने के लिए योगी सरकार ने ऑनलाइन इंतजाम भी किया है। महाकुम्भ में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत न आने पाए इसके लिए उत्तर प्रदेश वन निगम ने अलाव की लकड़ी की व्यवस्था को भी ऑनलाइन कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में वाराणसी से सांसद बनने के बाद अपने ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक, ट्रेड फैसिलिटी सेंटर (टीएफसी), जिसे पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल के नाम से जाना जाता है, की आधारशिला रखी थी।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति है कि 2022 के चुनाव में जिन बूथों पर सपा कमजोर रही, वहां विशेष अभियान चलाकर मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़ा जाए।
वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, भारत की धार्मिक मान्यताओं का केंद्र और शिव की प्रिय नगरी है। यह नगरी मोक्ष और आध्यात्मिकता की प्रतीक मानी जाती है।
वाराणसी में गंगा नदी में चलने वाली नावों के किराए को सोमवार को तय कर दिया गया। अस्सी घाट से नमो घाट तक आने-जाने का किराया एक व्यक्ति के लिए 345 रुपये निर्धारित किया गया है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के दो किलोमीटर दायरे में अवैध रूप से चल रही मांस की दुकानों पर नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। मेयर अशोक कुमार तिवारी ने निर्देश दिए हैं कि ऐसी दुकानों पर एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही प्रतिबंधित चीनी मांझा बेचने वालों पर जुर्माना लगाने के लिए सख्त अभियान चलाने की बात कही गई।
वाराणसी के करौंदी में आयोजित काशी सांसद रोजगार मेले में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की बौछार हुई। इस आयोजन में 300 कंपनियों के 600 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और 15,000 युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया गया है।