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Vns News: वाराणसी में डॉल्फिन सफारी, गंगा की लहरों पर अब दिखेगा प्राकृतिक सौंदर्य

उत्तर प्रदेश के पावन शहर वाराणसी से अब एक नया eco-tourism अनुभव जुड़ने जा रहा है। वन विभाग ने वाराणसी में डॉल्फिन सफारी शुरू करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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Vns News: वाराणसी में डॉल्फिन सफारी, गंगा की लहरों पर अब दिखेगा प्राकृतिक सौंदर्य

उत्तर प्रदेश के पावन शहर वाराणसी से अब एक नया eco-tourism अनुभव जुड़ने जा रहा है। वन विभाग ने वाराणसी में डॉल्फिन सफारी शुरू करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। यह सफारी टाइगर सफारी की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक नाव से गंगा की लहरों पर डॉल्फिन को नजदीक से देख सकेंगे। इस परियोजना को लेकर विभाग की Divisional Forest Officer (DFO) स्वाति ने जानकारी साझा की है।

गंगा में डॉल्फिन की बढ़ती संख्या बनी आकर्षण का केंद्र

वन विभाग के अनुसार, वाराणसी शहर से दूर कैथी से ढकवां गांव के बीच गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है। गंगाजल की गुणवत्ता में सुधार इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस क्षेत्र को अब dolphin hotspot के रूप में विकसित किया जा रहा है।

परियोजना की हुई शुरुआत, जल्द मिलेगा ऑनलाइन पोर्टल

डीएफओ स्वाति ने बताया कि यह परियोजना आज officially launch कर दी गई है। इसके तहत जल्द ही एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां पर्यटक अपनी registration कर सकेंगे। शुरुआत में सुबह 6 से 7 बजे के बीच यह डॉल्फिन सफारी आयोजित की जाएगी, क्योंकि इस समय डॉल्फिन को देखना सबसे आसान होता है। यदि इस समय पर्यटकों की संख्या अधिक होती है, तो शाम के समय भी सफारी शुरू करने की योजना है।

सुरक्षित और सीमित संख्या में होगी सफारी

सफारी प्रक्रिया को लेकर अधिकारी ने बताया कि एक बार में 6 से 7 पर्यटकों को नाव पर सवारी करने की अनुमति होगी। सभी को पहले registration कराना अनिवार्य होगा। सफारी में वन विभाग की नावों का उपयोग किया जाएगा और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल वाराणसी में tourism boost देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। ढकवां पॉइंट को पर्यटन मानचित्र पर लाने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने में भी यह सफारी सहायक होगी। स्वाति ने बताया कि डॉल्फिन की बढ़ती संख्या गंगा में जल की स्वच्छता और पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर होने का प्रमाण है।

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