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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं किसान, सरकार ने बताया इच्छा विरूद्ध

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नई दिल्ली : सरकार द्वारा दोनों सभाओं से पारित तीनों कृषि कानून मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। वहीं इस कानून को लेकर कोर्ट ने चार सदस्यों का भी गठन किया है, जिससे किसान खासे नाराज है। किसानों का कहना हैं कि इस कमेटी के सदस्य वहीं लोग हैं, जिन्होंने इस कानून की पैरवी की थी।

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि सरकार अपने ऊपर से दबाव कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जरिए कमेटी ले आई, इसका हमने कल ही विरोध कल दिया था। हम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कमेटी को नहीं मानते हैं, कमेटी के सारे सदस्य कानूनों को सही ठहराते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा 26 जनवरी का प्रोग्राम पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, जिस तरह से भ्रम फैलाया जा रहा है जैसे किसी दुश्मन देश पर हमला करना हो, ऐसी गैर ज़िम्मेदार बातें संयुक्त किसान मोर्चा की नहीं हैं। 26 जनवरी के प्रोग्राम की रूपरेखा हम 15 जनवरी के बाद तय करेंगे।

वहीं किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि कल हम लोहड़ी मना रहे हैं जिसमें हम तीन कृषि क़ानूनों को जलाएंगे, 18 जनवरी को महिला दिवस है और 20 जनवरी को गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश उत्सव है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमारी इच्छा के विरुद्ध हुआ है, हम चाहते थे कि कानून यथावत रहें और होल्ड न हों। लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य है और हम निर्णय का स्वागत करते हैं।

आपको बता दें कि विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार सदस्‍यीय कमेटी का गठन किया है उनमें भूपिंदर सिंह मान (अध्यक्ष बेकीयू), डॉ. प्रमोद कुमार जोशी (अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान), अशोक गुलाटी (कृषि अर्थशास्त्री) और अनिल धनवट (शिवकेरी संगठन, महाराष्ट्र) शामिल हैं। इनमें कुछ नामों को लेकर किसान संगठनों को आपत्ति है, जिनमें प्रमुख भूपिंदर सिंह मान और अशोक गुलाटी है।

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