उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में निरंतर नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है—एग्रीवोल्टिक्स परियोजना को अपनाकर उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसे एशियाई विकास बैंक (ADB) से इस परियोजना के लिए 4.15 करोड़ रुपये की तकनीकी सहायता प्राप्त हुई है।
क्या है एग्रीवोल्टिक्स परियोजना?
एग्रीवोल्टिक्स परियोजना के अंतर्गत एक ही भूमि पर दोहरी उपयोगिता संभव होगी—भूमि की सतह पर खेती और सतह के ऊपर सौर ऊर्जा का उत्पादन। इससे न केवल किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा, बल्कि हरित ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
एडीबी से मिला अनुदान: एक बड़ी उपलब्धि
उत्तर प्रदेश सरकार ने “उत्तर प्रदेश में एग्रीवोल्टिक्स परियोजनाओं का प्रदर्शन” शीर्षक से तकनीकी सहायता का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) को भेजा था। यह प्रस्ताव 28 फरवरी 2025 को DEA की 153वीं स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में मंजूर हुआ। इसके तहत ADB से 0.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹4.15 करोड़) की तकनीकी सहायता स्वीकृत हुई है।
कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में समन्वय: किसानों की आमदनी में वृद्धि
प्रदेश की सीमित भूमि को देखते हुए यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। एक ओर जहां कृषि उत्पादन जारी रहेगा, वहीं दूसरी ओर सौर ऊर्जा के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिलेगा।
सतत विकास की ओर उत्तर प्रदेश का सार्थक कदम
यह पहल न केवल किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। यूपीनेडा द्वारा किए गए इस नवाचार से प्रदेश को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में सहायता मिलेगी।
दूसरे राज्यों के लिए बन सकता है उदाहरण
यदि यह पायलट परियोजना सफल होती है, तो इसके आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार भारत सरकार के सहयोग से एक व्यापक नीति तैयार करेगी। यह परियोजना आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन सकती है।
नवाचार से आगे बढ़ता उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि दर्शाती है कि नवाचार, नीति और नियोजन के समन्वय से कैसे एक राज्य न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बना सकता है, बल्कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश का नेतृत्व कर सकता है।