संसद के बजट सत्र के दौरान पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर सियासत तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बयान देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने विधेयक का विरोध करते हुए खुद को ‘रामजी का वंशज’ बताया और कहा कि “अगर वक्फ में गैर-मुस्लिमों को शामिल किया जा सकता है, तो मुझे भी राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल किया जाए।”
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “सरकार वक्फ बोर्ड में 22 सदस्यों में से 12 गैर-मुस्लिमों को शामिल करना चाहती है। सवाल ये है कि क्या उन्हें वक्फ की जानकारी है? अगर ऐसा है, तो फिर मुझे भी राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल कर लीजिए। मैं भी रामजी का वंशज हूं, और इसे साबित भी कर सकता हूं।”
मसूद ने कहा कि वक्फ की संपत्तियों से मिलने वाली आमदनी का उद्देश्य यतीमों, बेसहारों और जरूरतमंदों की मदद करना होता है। उन्होंने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “राज्य में 78% वक्फ संपत्तियों को विवादास्पद घोषित कर दिया गया है। ऐसे में कल कोई भी व्यक्ति इन संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा कर सकता है।”
इमरान मसूद ने सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा, “सरकार बार-बार कह रही है कि मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन विधेयक में जो प्रावधान किए गए हैं, उनसे वक्फ संपत्तियों का अस्तित्व खतरे में है। यदि किसी संपत्ति में सरकार की हिस्सेदारी है और वह विवादित है, तो वह वक्फ संपत्ति तब तक नहीं मानी जाएगी जब तक जांच पूरी न हो जाए।”
इमरान मसूद ने एनडीए के सहयोगी दलों जैसे TDP और JDU को भी निशाने पर लेते हुए कहा, “अगर इन दलों ने मुसलमानों का साथ नहीं दिया, तो देश का मुसलमान उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।”
कांग्रेस पार्टी ने पहले ही वक्फ संशोधन विधेयक का खुले तौर पर विरोध किया है। इमरान मसूद, जो जेपीसी के सदस्य भी हैं, ने सरकार को चर्चा की चुनौती देते हुए कहा कि वे बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन विधेयक के पीछे की मंशा को उजागर करना जरूरी है।