17 वर्षों से पनकी क्षेत्र में जमा हो रहा कूड़ा अब अतीत की बात बनने जा रहा है। नगर निगम ने भऊ सिंह कूड़ा निस्तारण प्लांट में डंप करीब 12 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए शासन से ₹45 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है और संबंधित कंपनी को Tender के माध्यम से कार्यादेश जारी किया जा चुका है। यह कार्य 10 अप्रैल से शुरू होगा।
एनजीटी की सख्ती से आई तेजी, IIT ने बनाई DPR
इस परियोजना की नींव उस समय पड़ी जब National Green Tribunal (NGT) ने प्लांट का निरीक्षण कर कूड़े के पहाड़ों पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद नगर निगम ने IIT कानपुर से प्लांट का सर्वे कराया और Detailed Project Report (DPR) तैयार कर शासन को भेजी। शासन ने न केवल रिपोर्ट को मंजूरी दी बल्कि 45 करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी की। साथ ही, निस्तारण कार्य की Third Party Monitoring का ज़िम्मा भी IIT कानपुर को सौंपा गया है।
कूड़े के पहाड़ों से हवा और जल दोनों को था खतरा
पनकी स्थित प्लांट पर लगभग 100 फीट ऊंचे कूड़े के ढेर बन चुके थे, जिससे आसपास के गांवों और न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के निवासी बदबू, जहरीले धुएं और जल प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। पहले भी करीब 4 लाख मीट्रिक टन कूड़े को सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजकर उसका उपयोग ईंधन के रूप में किया गया था, लेकिन अब बचे हुए 12 लाख टन कूड़े को पूरी तरह से हटाने की योजना है।
Mini Forest या Green Park बनेगा भविष्य की पहचान
नगर निगम की योजना है कि कूड़ा हटने के बाद खाली हुई 46 एकड़ जमीन पर Miyawaki पद्धति से मिनी जंगल या एक सुंदर Green Park विकसित किया जाएगा। इससे न केवल क्षेत्र को नया स्वरूप मिलेगा, बल्कि पर्यावरण के लिहाज़ से भी यह एक सकारात्मक कदम होगा।
इतिहास और चुनौती
यह कूड़ा निस्तारण प्लांट वर्ष 2007 में शुरू हुआ था, जब A to Z कंपनी को जैविक खाद बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन तीन साल में ही कंपनी कार्य छोड़कर चली गई। बाद में IL&FS ने भी प्रयास किया, मगर सफलता नहीं मिली। इसके बाद नगर निगम खुद ही कूड़ा प्लांट में डंप करता रहा, जिससे कचरे के पहाड़ खड़े हो गए। ऐसे में कानपुरवासियों के लिए यह परियोजना स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बड़ी राहत लेकर आएगी।