राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने IIT-BHU की शाखा में भाग लेते हुए छात्रों से खुलकर संवाद किया। उन्होंने युवाओं से सीधा सवाल किया—“क्या आप संघ को समझते हैं?” इस प्रश्न के उत्तर में छात्रों ने बताया कि संघ का उद्देश्य हिंदुत्व को बढ़ावा देना, सनातन संस्कृति की रक्षा, और युवा शक्ति को सही दिशा देना है। इस अवसर पर 100 से अधिक छात्रों ने योग, स्पोर्ट्स और मंत्रोच्चारण में हिस्सा लिया। संघ प्रमुख ने विद्यार्थियों के साथ करीब से बातचीत की और उन्हें संघ की मूल विचारधारा से अवगत कराया।
संघ का उद्देश्य: आत्मविकास और समाजसेवा
मोहन भागवत ने छात्रों को बताया कि संघ का दर्शन कहता है- “1 घंटा आत्म-विकास के लिए और 23 घंटे समाज कल्याण के लिए।” संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ सेवा को ही जीवन का उद्देश्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि संघ कार्यकर्ता जाति, पंथ, भाषा या क्षेत्र के आधार पर भेद नहीं करते। सभी को साथ लेकर चलना ही संघ का मूल दर्शन है।
जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकता पर जोर
संघ प्रमुख ने युवाओं से आग्रह किया कि वे समाज में सामूहिक सद्भावना को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि मंदिर, श्मशान और जलस्रोत जैसी जगहें सबके लिए समान होनी चाहिए। हिंदू समाज को जोड़ने के लिए मित्रता, सहयोग और समानता के मूल्यों को अपनाना ज़रूरी है।
IIT-BHU में दो घंटे रहे संघ प्रमुख, अधिकारियों से की मुलाकात
शाखा सत्र के बाद मोहन भागवत IIT गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने टोलियों के प्रमुखों से चर्चा की और भविष्य की रणनीतियां तय कीं। इस दौरान IIT-BHU के डायरेक्टर और BHU के अन्य प्रोफेसर भी उनसे मिलने पहुंचे। भागवत ने टोलियों को संगठित और सक्रिय करने पर जोर दिया और कहा कि संघ का विस्तार तभी संभव है जब स्वयंसेवक अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करें।
संघ के प्रशिक्षण में बदलाव: अब 15 दिन का होगा प्रथम वर्ष का वर्ग
संघ ने अब पहले वर्ष के प्रशिक्षण को 15 दिनों का कर दिया है, जिसे अब “कार्यकर्ता विकास वर्ग” कहा जाएगा। यह बदलाव उन युवाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है जो मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल कोर्स में व्यस्त रहते हैं।
5 अप्रैल: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मोहन भागवत ने दर्शन किया और कुशलता की विनती की फिर प्रबुद्धजनों से संवाद किया।
1. 2025 विजयादशमी से संघ के शताब्दी वर्ष की शुरुआत, मंडल और नगर स्तर पर आयोजन
2. नवंबर 2025 – जनवरी 2026 तक घर-घर संपर्क अभियान
3. सभी मंडलों और बस्तियों में हिंदू सम्मेलन
4. सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए बैठकें
5. प्रमुख नागरिकों से संवाद
6. युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन