राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 3 अप्रैल से 7 अप्रैल तक काशी (वाराणसी) के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई अहम बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। संघ प्रमुख के इस दौरे को संघ के आगामी शताब्दी वर्ष की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शताब्दी वर्ष की योजनाओं पर मंथन
मोहन भागवत संघ के 100वें स्थापना वर्ष की तैयारियों को लेकर वाराणसी में गहन विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान विभिन्न योजनाओं और अभियानों की रूपरेखा तय की जाएगी, जिनके तहत संघ को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है।
स्वयंसेवकों को मिलेंगे दिशा-निर्देश
संघ प्रमुख अपने प्रवास के दौरान स्वयंसेवकों से सीधे संवाद भी करेंगे और आगामी अभियानों को लेकर उन्हें दिशा-निर्देश देंगे। विशेष रूप से यह प्रयास किया जाएगा कि हर गांव, हर बस्ती और हर घर तक संघ का साहित्य पहुंचे। इसके लिए स्वयंसेवकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
घर-घर संघ साहित्य पहुंचाने का लक्ष्य
संघ ने तय किया है कि वह आने वाले समय में एक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगा। अक्टूबर-नवंबर से शुरू होने वाले इस अभियान में स्वयंसेवक हर गांव और मोहल्ले तक जाकर संघ साहित्य और विचारधारा को पहुंचाने का काम करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति को संघ की सोच और कार्यशैली से जोड़ना है।
प्रबुद्ध वर्ग से होगा संवाद
अपने काशी प्रवास के दौरान मोहन भागवत समाज के प्रबुद्ध वर्ग से भी संवाद करेंगे। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, व्यापारी, बुद्धिजीवी वर्ग और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। यह संवाद संघ के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संघ प्रमुख का यह दौरा संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम है। काशी में होने वाले इन कार्यक्रमों के ज़रिए संघ की आगामी रणनीति और योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा, जो शताब्दी वर्ष को एक बड़े जनांदोलन में बदलने की दिशा में कदम होगा।