नवरात्रि के दूसरे दिन माँ आदिशक्ति के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है। इस दिन हिमालय पुत्री पार्वती के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना कर भक्त अपने जीवन में संयम, साधना और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होते हैं। मिर्जापुर स्थित पावन विंध्याचल धाम में माँ विंध्यवासिनी का यह रूप विशेष रूप से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
माँ ब्रह्मचारिणी: संयम, साधना और श्रद्धा की प्रतीक
माँ ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण किए हुए, एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल लेकर अपने भक्तों को साधना व संयम का मार्ग दिखाती हैं। उनका यह स्वरूप सभी प्राणियों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। विन्ध्य पर्वत व गंगा नदी के पावन संगम तट पर स्थित यह स्थान अनादिकाल से ही श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।
माँ विंध्यवासिनी: भक्तों की पीड़ा हरने वाली
विंध्याचल क्षेत्र में माँ को ‘विन्दुवासिनी’ या ‘विंध्यवासिनी’ के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन जब माँ को ब्रह्मचारिणी रूप में पूजा जाता है, तब माना जाता है कि वह अपने भक्तों की सभी पीड़ाओं को हर लेती हैं। उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता, नयी ऊर्जा और आत्मिक बल का संचार होता है।
नवरात्रि में उमड़ रही आस्था की गंगा
नवरात्रि के इन पावन दिनों में विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। देश के कोने-कोने से भक्त यहाँ माँ के दर्शन हेतु पहुंचते हैं। कई भक्त तो पूरे नवरात्रि तक यहाँ निवास कर माँ की आराधना करते हैं। उनका विश्वास है कि तन-मन से की गई पूजा से माँ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।
मनोहारी दर्शन से मिलती है परम शांति
माँ के किसी भी रूप में दर्शन करने से भक्तों को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है। उनके दरबार में पहुंचने के बाद भक्तों के चेहरे पर संतोष और मन में शांति का अनुभव होता है। ऐसा माना जाता है कि माँ की कृपा से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और हर दिशा में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
विधिपूर्वक पूजा से होती है सभी इच्छाओं की पूर्ति
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में विधिविधान का विशेष महत्व है। जो भक्त श्रद्धा और नियम से माँ की पूजा, जप और ध्यान करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माँ न केवल सांसारिक सुख प्रदान करती हैं, बल्कि भक्तों को मोक्ष का मार्ग भी दिखाती हैं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना से भक्तों को न केवल आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, बल्कि जीवन में हर प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माँ के दर्शन मात्र से भक्तों को एक नई दिशा और ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में विंध्याचल धाम में माँ के दर्शन करना हर भक्त के लिए एक दिव्य अनुभव बन जाता है।