उत्तर प्रदेश का एक रणनीतिक और भौगोलिक रूप से अहम शहर है, जिसकी देखरेख नोएडा प्राधिकरण करता है। चूंकि यह प्राधिकरण एक स्वायत्त (Autonomous) संस्था है, इसलिए इसे सरकार के आम बजट से आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। बीते वर्षों में जमीन की उपलब्धता में कमी आने से इसकी वित्तीय आय पर भी असर पड़ा है। ऐसे में अब प्राधिकरण खुद का एक कॉर्पस फंड बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
FD के जरिए सुरक्षित और लाभकारी निवेश की योजना
प्राधिकरण की योजना है कि साल में मिलने वाले एकमुश्त लीज रेंट की राशि को एक विशेष खाते में जमा किया जाए और इसे किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में निवेश किया जाए। इससे न केवल सुरक्षित निवेश सुनिश्चित होगा, बल्कि अच्छे ब्याज दर से आमदनी भी होगी। यह प्रक्रिया हर वर्ष दोहराई जाएगी ताकि कॉर्पस फंड में लगातार वृद्धि होती रहे।
हर साल अनुरक्षण में खर्च हो रहे 1000-1500 करोड़
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, वर्तमान में सड़कों, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अनुरक्षण पर सालाना लगभग 1000 से 1500 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में भविष्य में जब अनुरक्षण कार्यों की आवश्यकता और बढ़ेगी, तब यही कॉर्पस फंड एक मजबूत वित्तीय सहारा बनेगा।
वित्तीय बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव
प्राधिकरण इस योजना को आगामी वित्तीय बैठक में प्रस्तावित करने जा रहा है। बोर्ड की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा। यह कदम ना केवल शहर की आधारभूत सुविधाओं के बेहतर रख-रखाव में मदद करेगा, बल्कि वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास भी होगा।