गंगा तट की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में अब घाटों पर होने वाले आयोजनों को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है। वाराणसी नगर निगम ने तय किया है कि अब गंगा घाटों पर किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक, धार्मिक या सामाजिक आयोजन के लिए पूर्व अनुमति लेना और शुल्क देना अनिवार्य होगा। नगर निगम का यह निर्णय घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
क्या हैं नए नियम?
नगर निगम के अनुसार, गंगा के घाटों की 7 किलोमीटर की परिधि में आने वाले सभी घाटों पर आयोजन करने के लिए अब 15 दिन पहले स्मार्ट काशी ऐप के जरिए आवेदन करना होगा। इस ऐप के माध्यम से ही अनुमति दी जाएगी।
🔹आयोजन के लिए वाराणसी नगर निगम से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
🔹शुल्क का निर्धारण जिला प्रशासन द्वारा तय सर्किल रेट के अनुसार किया गया है, जो 880 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगा।
🔹गंगा आरती जैसे नियमित धार्मिक अनुष्ठान इस नियम से अलग रहेंगे, इन आयोजनों पर कोई शुल्क या अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
किन कार्यक्रमों पर लागू होगा नियम?
यह व्यवस्था फिल्म शूटिंग, धार्मिक उत्सव, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, सामाजिक आयोजन जैसे सभी प्रकार की गतिविधियों पर लागू होगी। वर्तमान में अधिकांश घाटों पर ऐसे आयोजनों के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता था, लेकिन अब यह नियम नमो घाट समेत सभी बड़े घाटों पर लागू होगा।
क्यों लाई गई ये व्यवस्था?
वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। घाटों पर अक्सर भीड़भाड़, अव्यवस्था और सफाई की समस्या बनी रहती थी, जिसे अब नियंत्रित और व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कब से लागू होंगे ये नियम?
नगर निगम का कहना है कि आगामी 5 से 6 दिनों में यह नई व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू कर दी जाएगी। इसके बाद बिना अनुमति और शुल्क अदा किए कोई भी व्यक्ति या संस्था घाटों पर आयोजन नहीं कर पाएगी।
क्या है जनता की प्रतिक्रिया?
यह निर्णय जहां प्रशासनिक दृष्टिकोण से घाटों को सुव्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इससे आम जन या धार्मिक संस्थाओं को घाटों पर आयोजन करने में आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हालांकि गंगा आरती जैसे परंपरागत आयोजनों को इस नियम से बाहर रखा जाना संतोषजनक है।
वाराणसी नगर निगम का यह नया नियम घाटों पर बढ़ते आयोजन और उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली अव्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया और पारदर्शिता बरती गई, तो यह कदम गंगा घाटों की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखने में सहायक साबित हो सकता है।