Home उत्तर प्रदेश यूपी में अब मकान मालिक और किराएदार के बीच खत्म होगा विवाद, पढ़े पूरी खबर विस्तार से..

यूपी में अब मकान मालिक और किराएदार के बीच खत्म होगा विवाद, पढ़े पूरी खबर विस्तार से..

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लखनऊ: उत्तरप्रदेश की योगी सरकार मकान मालिक के साथ-साथ अब किरायदार के बारें में भी सक्रीय हो गई है। इसी को लेकर योगी सरकार ने किरायेदार कानून को कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी है।

इस नए कानून के लागू होने के बाद से अब मकान मालिक और किराएदार के बीच होने वाले विवाद काफी हदतक खत्म हो जाएंगे। इतना ही नहीं इस कानून के तहत ये आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि प्रदेश में कितने लोग अपने घरों को किराए पर दे रहे हैं।

उत्तरप्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन द्वितीय अध्यादेश 2021 को लेकर कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में आयोजित बैठक में मंजूरी दे दी गई है। इस नए अध्यादेश में रेंट अथॉरिटी और रेस्ट ट्रिब्यूनल दोनों का प्रावधान रखा गया है। वहीं, मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया भी नहीं बढ़ा सकेंगे। किरायेदार रखने से पहले मकान मालिक को इसकी सूचना किराया प्राधिकरण को देना होगा। साथ ही मकान मालिक को तीन माह के अंदर अनुबंध पत्र किराया प्राधिकरण में जमा करना होगा।

क्या है रेंट ट्रिब्यूनल?

ये एक ऐसा नियम है जिसके तहत अब माकन मालिकों और किरायेदारों के बीच होने वाले विवाद अधिकतम 60 दिनों के अंदर ही निस्तारित हो जायेंगे। नए कानून की गाइडलाइन्स के मुताबिक अब माकन मालिक बिना अनुबंध के किसी किरायेदार को नहीं रख सकेंगे।

इस कानून से होने वाले लाभ/ फायदे:

-अब मनमाना किराया भी नहीं वसूल सकेंगे मकान मालिक। सालाना केवल पांच से सात फीसदी ही किराये में वृद्धि की जा सकेगी।

-दो महीने तक किराया न देने पर किरायेदार को मकान मालिक हटा सकेंगे। किरायेदार घर में बिना पूछे तोड़फोड़ नहीं कर सकेंगे। पहले से रह रहे किराएदारों के साथ यदि अनुबंध नहीं है तो इसके लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

-सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर मकान मालिक आवासीय परिसर के लिए दो महीने से अधिक एडवांस नहीं ले सकेंगे जबकि गैर आवासीय परिसरों के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।

सबसे ख़ास बात, ये कानून कंपनी, विश्वविद्यालय या कोई संगठन, सेवा अनुबंध के रूप में अपने कर्मचारियों को किराये पर कोई मकान देते हैं तो उन पर यह लागू नहीं होगा। धार्मिक, धार्मिक संस्थान, लोक न्याय अधिनियम के तहत पंजीत ट्रस्ट, वक्फ के स्वामित्व वाले परिसर पर भी किरायेदारी कानून प्रभावी नहीं होगा। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही प्रदेश सरकार ने केंद्र के मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नया अध्यादेश तैयार किया है।

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