उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को श्रृंगवेरपुरधाम स्थित निषादराज पार्क पहुंचे और निषादराज गुह्य की जयंती समारोह में भाग लिया। इस मौके पर एक 5 वर्षीय बालक ने उन्हें शिव तांडव स्तोत्र सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। योगी ने पार्क में स्थापित प्रभु श्रीराम और निषादराज की मिलन मुद्रा में बनी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और कई विकास योजनाओं के 20 लाभार्थियों को चेक वितरित किए।
योजनाओं के माध्यम से सशक्तिकरण
योगी ने इस अवसर पर PM मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट सब्सिडी, सामूहिक दुर्घटना बीमा, मत्स्य पालक कल्याण कोष, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना, NRLM ऋण, और होम स्टे योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को चेक दिए। उन्होंने बताया कि 1400 मत्स्य पालकों के खातों में करोड़ों रुपये भेजे जा चुके हैं।
पहले पता नहीं चलता था प्रयागराज कहां है – योगी
जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा: “आज प्रयागराज को वैश्विक पहचान मिल चुकी है। पहले प्रयागराज का परिचय वाराणसी के बगल में स्थित शहर के रूप में देना पड़ता था, अब यह स्वयं एक पहचान बन गया है।” वहीं उन्होंने वक़्फ़ बोर्ड को लेकर कहा कि जब प्रयागराज महाकुंभ हो रहा था तो ये वक़्फ़ बोर्ड वाले उसको भी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति बता रहे थे, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार जिन्होंने ये बिल लाया। आगे उन्होंने कहा कि ये प्रयागराज हमारा पवित्र धाम है,देश दुनिया के लोग हमारे प्रयागराज में आकर श्रद्धा से नमन करते हैं।
फिर आगे कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन से शहर को स्मार्ट सिटी से आगे बढ़ाकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
पहले की सरकारें माफिया को देती थीं बढ़ावा
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा: “पूर्ववर्ती सरकारें हर जिले में एक माफिया पैदा करती थीं। उनके लिए न राष्ट्र सर्वोपरि था, न संस्कृति। ऐसे लोग कभी भी महाकुंभ जैसे भव्य आयोजन नहीं कर सकते थे।” उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार संस्कृति, पर्यटन और विरासत को सहेजने के साथ-साथ विकास और सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही है।
योगी बोले- प्रयागराज अब इलाहाबाद नहीं रहा
योगी ने कहा- हमारा प्रयागराज अब सामान्य रूप से इलाहाबाद नहीं रहा। अब ये प्रयागराज हो गया है। प्रयाग का मतलब- मिलन स्थल… प्रयागराज का मतलब- महामिलन स्थल। गंगा, यमुना और सरस्वती तो मिलती हैं, लेकिन यहां प्रभु राम और निषादराज का मिलन हुआ।
जो लोग प्रयागराज की पहचान छिपाते थे, वो नहीं चाहते थे कि प्रयागराज को नई पहचान मिले। वो नहीं चाहते थे कि भगवान राम और निषादराज के मिलन स्थल को एक पहचान मिले।
श्रद्धा और विरासत का संगम: प्रयागराज के नए कॉरिडोर
योगी ने प्रयागराज में हो रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि महाकुंभ के बहाने कई धार्मिक कॉरिडोर जैसे:
निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे प्रयागराज को एक नवीन और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।