राजस्थान राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन, लखनऊ के गांधी सभागार में एक भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा और मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अनुरूप आयोजित हुआ। समारोह में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
राजस्थान के पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों की प्रस्तुति ने समारोह में चार चाँद लगा दिए। चरी नृत्य, कालबेलिया, भवई और घूमर जैसे नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने राजस्थान की लोकसंस्कृति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
समारोह में अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल, डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने राज्यपाल का संदेश पढ़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अब सभी राजभवनों में राज्यों के स्थापना दिवस मनाए जा रहे हैं, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। राज्यपाल ने राजस्थान की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता की सराहना करते हुए राज्य के निरंतर विकास की शुभकामनाएं दीं।
राजस्थान की स्थापना 30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से हुई थी, जिसे ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ नाम दिया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल की सक्रिय भूमिका इस एकीकरण में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। पहले ‘राजपूताना’ के नाम से प्रसिद्ध इस क्षेत्र का नाम ‘राजस्थान’ रखा गया, जिसका अर्थ है ‘राजाओं का स्थान’। यह भूमि महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल, वीर तेजाजी, पन्ना धाय, मीराबाई और भक्त कर्माबाई जैसे महापुरुषों की भूमि रही है, जिनकी वीरता, भक्ति और बलिदान आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
राजस्थान का पर्यटन उद्योग भी विश्वविख्यात है। जयपुर का हवामहल, उदयपुर की झीलें, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर के किले, विदेशी एवं देशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ के पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे जोधपुरी जूतियां, लघु चित्रकला, कठपुतली, कालीन, और घेवर जैसी मिठाइयां भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
समारोह में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, ऐतिहासिक स्थलों और व्यंजनों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी और डॉक्यूमेंट्री भी प्रस्तुत की गई। दर्शकों ने राजस्थान के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पक्षों को नजदीक से जाना और सराहा। समारोह स्थल की रंगोली सज्जा भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
राजस्थान आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 हजार करोड़ और फिर 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। इनमें सड़क, रेलवे, जल, ऊर्जा, और पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
समारोह में विभिन्न वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, विश्वविद्यालय के छात्रों, राजभवन के अधिकारी-कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया। प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा, अनिल कुमार, मनीष चौहान, राजेश कुमार, अजय जैन, शलभ माथुर, मनीष कुमार शांडियाल जैसे कई वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे। सभी ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
राजस्थान राज्य स्थापना दिवस का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह भारत की एकता और विविधता का उत्सव भी था। इस कार्यक्रम ने ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को सशक्त किया और यह संदेश दिया कि विभिन्नता में ही हमारी एकता और शक्ति निहित है।