राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर 17 से 21 अप्रैल तक अलीगढ़ के प्रवास पर रहेंगे। इस प्रवास को केवल एक सामान्य दौरा न मानकर इसे राजनीतिक और सामाजिक संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस दौरान वह ब्रज क्षेत्र के 29 जिलों के संघ पदाधिकारियों से चरणबद्ध तरीके से मुलाकात करेंगे और गांव-गांव तक समाज को संगठित करने का मंत्र देंगे। वहीं, उनके कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की आधिकारिक बैठक शामिल नहीं है, लेकिन स्थानीय सांसद और विधायक उनसे मिलने का प्रयास कर रहे हैं।
संघ प्रमुख का फोकस: हिंदू समाज का संगठन और भविष्य की रणनीति
हाल के दिनों में वक्फ संपत्तियों और वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में माहौल गर्म है। साथ ही, यूपी में 2025 के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे अहम राजनीतिक पड़ाव भी सामने हैं। ऐसे में संघ प्रमुख का यह प्रवास विशेष महत्व रखता है।
संभावना जताई जा रही है कि मोहन भागवत का संदेश हिंदुत्व और सामाजिक एकजुटता पर केंद्रित रहेगा। स्वयंसेवकों को गांव स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे संघ का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे।
4 अप्रैल को समन्वय बैठक, तैयारियों को अंतिम रूप
केशव सेवा धाम, सिंघारपुर में 4 अप्रैल को समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक दोपहर 1 बजे से शुरू होगी और देर शाम तक चलेगी। माना जा रहा है कि यह बैठक संघ प्रमुख के प्रवास की तैयारियों और वक्फ बिल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सकारात्मक रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई है।
इस बैठक में अलीगढ़ और आसपास के जिलों के संघ पदाधिकारी, साथ ही शाम को 5:45 बजे से आनुषांगिक संगठनों की भी बैठक होगी। बैठक में अलीगढ़ और हाथरस के जनप्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है।
7 अप्रैल को उपमुख्यमंत्री करेंगे माधव सम्मेलन केंद्र का लोकार्पण
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 7 अप्रैल को अलीगढ़ दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह सिंघारपुर स्थित सीबी गुप्ता सरस्वती विद्यापीठ परिसर में बने माधव सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन करेंगे।
इसके पश्चात दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे
मोहन भागवत का यह अलीगढ़ प्रवास न सिर्फ संघ की कार्यप्रणाली को और मजबूत करेगा, बल्कि आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक संकेत भी दे सकता है। हिंदू समाज की एकजुटता और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका इस प्रवास की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।