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Political News: सांसदों की सैलरी बढ़ी, लेकिन सपा सांसद ने उठाए सवाल… कहा- सैलरी नहीं, सांसद निधि बढ़ाइए

24% वेतन बढ़ोतरी के बाद भी संतुष्ट नहीं सपा सांसद आनंद भदौरिया, विकास निधि बढ़ाने की रखी मांग...

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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Political News: सांसदों की सैलरी बढ़ी, लेकिन सपा सांसद ने उठाए सवाल… कहा- सैलरी नहीं, सांसद निधि बढ़ाइए

हाल ही में केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन और भत्तों में 24 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसकी अधिसूचना संसदीय कार्य मंत्रालय ने 24 मार्च 2025 को जारी की। इसके तहत सांसदों को अब तक मिलने वाले 1 लाख रुपये के वेतन को बढ़ाकर 1.24 लाख रुपये कर दिया गया है, जो कि 1 अप्रैल 2023 से लागू माना जाएगा। लेकिन इस बढ़ोतरी को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने आपत्ति जताई है।

“सैलरी नहीं, सांसद निधि बढ़ाइए” – आनंद भदौरिया

सपा सांसद आनंद भदौरिया का मानना है कि इस बढ़ोतरी का कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा क्योंकि महंगाई के अनुपात में यह बढ़ोतरी नाकाफी है। उन्होंने कहा कि सांसदों के लिए वेतन और भत्तों से ज्यादा ज़रूरी है सांसद निधि (MP Fund) को बढ़ाना। भदौरिया ने कहा, “उत्तर प्रदेश में एक विधायक को जहां 5 करोड़ रुपये की निधि मिलती है, वहीं एक सांसद जो 5 विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व करता है, उसे भी सिर्फ 5 करोड़ ही मिलते हैं, यह असमानता है।”

PMGSY के तहत सांसदों को मिले क्षेत्रीय विकास की शक्ति

भदौरिया ने सुझाव दिया कि यदि निधि बढ़ाना संभव नहीं है तो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत सांसदों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपने क्षेत्र में 50 से 100 किलोमीटर तक सड़क निर्माण की सिफारिश कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से विकास कार्यों को गति मिलेगी और जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा।

वेतन में क्या हुआ बदलाव?

नई अधिसूचना के अनुसार, सांसदों को अब:

  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (constituency allowance) के तहत 17,000 रुपये की वृद्धि के साथ कुल 87,000 रुपये मिलेंगे।
  • ऑफिस खर्च के लिए 75,000 रुपये (जिसमें 50,000 रुपये कंप्यूटर ऑपरेटर और 25,000 रुपये स्टेशनरी के लिए होंगे)।
  • हर साल 1.25 लाख रुपये फर्नीचर पर खर्च करने की अनुमति भी मिलेगी।

“जनता के लिए आए हैं, न कि सुविधाओं के लिए”

सपा सांसद ने साफ कहा कि वे सैलरी और भत्तों के लिए राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि जनता के विकास और हितों की लड़ाई लड़ने के लिए चुने गए हैं। उनकी प्राथमिकता है कि सांसदों को विकास कार्यों में अधिक भागीदारी मिले, जिससे ग्राम्य और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मज़बूती दी जा सके।

इस बयान के बाद अब यह मुद्दा एक नई बहस को जन्म दे रहा है—क्या सांसदों की सैलरी बढ़ाना जरूरी था, या उन्हें अधिक फंड और अधिकार देकर जनता के कार्यों में ज्यादा सक्रिय बनाना चाहिए?

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