नोएडा प्राधिकरण के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट न्यू नोएडा को लेकर तेजी से तैयारियां चल रही हैं। इस परियोजना में 209.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल है, जिसमें 80 गांवों को जोड़ा गया है – 60 गांव बुलंदशहर जिले से और 20 गांव गौतमबुद्ध नगर से।
इस परियोजना की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाने के लिए अब बुलंदशहर के जिलाधिकारी और बुलंदशहर एवं खुर्जा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को नोएडा प्राधिकरण बोर्ड में बतौर सदस्य नामित किया जा रहा है। अभी तक केवल गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी बोर्ड में शामिल थे।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर 2024 में जारी अधिसूचना के बाद जो भी निर्माण कार्य न्यू नोएडा क्षेत्र में किया गया है, उसे अवैध माना जाएगा। इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा।
सेटेलाइट मैप को इस प्रक्रिया का आधार बनाया गया है। अधिसूचना की तिथि के अनुसार जो भी निर्माण मैप पर दिखेगा, उसे ही वैध मानकर बाकी को अवैध घोषित किया जाएगा।
न्यू नोएडा प्रोजेक्ट के लिए किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन ली जाएगी। इसके लिए मुआवजा दर तय की जा रही है, जिसे नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड में पास करके लागू किया जाएगा। अधिग्रहण से संबंधित समस्त कार्यवाही नोएडा प्राधिकरण द्वारा ही की जाएगी, क्योंकि वही इस परियोजना की अधिकृत नोडल एजेंसी है।
चार चरणों में होगा न्यू नोएडा का विकास
न्यू नोएडा मास्टर प्लान को चार फेज में लागू किया जाएगा:
1. 2023-2027: 3,165 हेक्टेयर विकसित किया जाएगा
2. 2027-2032: 3,798 हेक्टेयर
3. 2032-2037: 5,908 हेक्टेयर
4. 2037-2041: 8,230 हेक्टेयर
इस पूरे मास्टर प्लान का उद्देश्य न्यू नोएडा को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समीप से शुरू की जा रही है, जहां जीटी रोड अलग होती है। शुरुआत में जोखा बाद और सांवली गांव की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इन गांवों के प्रधानों से संवाद किया गया है और सहमति आधारित प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
साथ ही, जोखाबाद और सांवली गांवों में न्यू नोएडा (DNGIR) का अस्थाई कार्यालय स्थापित करने की योजना है, जिससे किसानों और ग्रामीणों को सूचना और सहयोग आसानी से मिल सके।