उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपने चर्चित बयान ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ को लेकर हो रहे विवाद पर जवाब देते हुए कहा कि यह कोई विभाजनकारी नारा नहीं था, बल्कि समाज को जोड़ने और जागरूक करने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि “हम तो लोगों को जोड़ने की बात कर रहे हैं, बताने का प्रयास कर रहे हैं कि जब हम जातियों में बंटे थे, तभी देश गुलाम हुआ था।”
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के पॉडकास्ट को दिए इंटरव्यू में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि यह नारा उन्होंने उत्तर प्रदेश से ही दिया था: “बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यह संदेश लोगों को जागरूक करने का है, ताकि वे अपनी विरासत, संस्कृति और विकास पर ध्यान दें, न कि विभाजनकारी सोच पर।
योगी आदित्यनाथ ने उदाहरण देते हुए कहा, “क्या इतिहास में करोड़ों हिंदू नहीं मारे गए? क्या कश्मीर में लाखों हिंदुओं की हत्या नहीं हुई? हम इतिहास को क्यों भूल जाते हैं?” उन्होंने कहा कि इतिहास न केवल वर्तमान का आइना होता है, बल्कि भविष्य की योजना का आधार भी बनता है।
मुख्यमंत्री योगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह बयान किसी को डराने के लिए नहीं बल्कि सच्चाई से अवगत कराने के लिए था। उन्होंने कहा, “दंगाइयों को समझाने के लिए जो भाषा वे समझते हैं, वही अपनानी पड़ती है। ये हमारा दबंग स्टाइल नहीं बल्कि शराफत का स्टाइल है।” उन्होंने यह भी कहा कि “जो दंगाइयों के सामने घुटनों पर झुकते हैं, उन्हें घुटनों के बल चलना सिखाया जाता है।”
सीएम योगी ने Mahakumbh 2025 के सफल आयोजन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रयागराज में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि उसके साथ लूट, छेड़छाड़ या उत्पीड़न हुआ। उन्होंने बताया कि सीमित फोर्स के बावजूद वहां सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत थी कि कोई सामान्य अपराध भी नहीं कर सका। उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश की बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। यही डंडा है जो बेटियों की रक्षा करता है और दंगाइयों को उनके स्थान तक पहुंचाता है।”