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नौकरी छोड़ मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने में जुटे तीन दोस्त

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नौकरी छोड़ मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने में जुटे तीन दोस्त

कोरोना वैश्‍विक महामारी के बाद अस्‍त-व्‍यस्‍त और पस्‍त हो चुकी अर्थव्‍यवस्‍था में जान फूंकने की दरकार है। यद्यपि केंद्र सरकार देश को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए पहले ही 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा कर चुकी है।

निःसंदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकल के लिए वोकल बनकर उसे ग्‍लोबल बनाने का सपना चुनौतियों को अवसर में बदलने का मूलमंत्र साबित हो सकता है। पर यह जितना दूर से सहज दिख रहा है, वह उतना ही जटिल है।भारत के आत्‍मनिर्भर बनने की राह में अनेक कांटे और चुनौतियां हैं। सरकार को सबसे पहले उन चुनौतियों से दो-चार होना पड़ेगा तभी लोकल की स्‍वीकार्यता और व्‍यापकता को धरातल पर उतारा जा सकता है।

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ऐसा की कुछ नजारा देखने को मिला उत्तर प्रदेश के वाराणसी की जहा कोरोना काल में जहां एक ओर युवा अपने भविष्य और हाथ से फिसलती नौकरी को बचाने के लिए परेशान है।

आत्मनिर्भर बनने की चाहत गहराती है तो वह किसी भी तरह से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। कुछ समय पहले तक वाराणसी के चौबेपुर इलाके के नरायनपुर गांव के रहने वाले श्वेतांक पाठक ने भी ये बातें कहीं पढ़ी थी। इसी को गांठ बांधकर उन्होंने मोती (सीप) की खेती शुरू की।
शुरुआत में उन्होंने आलोचना सही लेकिन अब प्रधानमंत्री ने ट्विटर के जरिए इस युवा की सराहना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर नरायनपुर गांव के रहने वाले श्वेतांक पाठक एमए और बीएड पास कर मोती की खेती कर रहे हैं।

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श्वेतांक पाठक ने बताया कि वह कुछ अलग करना चाह रहे थे, इसके लिए उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया और खेती की नई-नई तकनीक के बारे में जानकारियां जुटाते रहे। इसी दौरान उनको मोती की खेती के बारे में पता चला। उन्हें लगा कि काफी कम पैसे और नाममात्र की जगह में यह काम किया जा सकता है।

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