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दहेज हत्या में डॉक्टर सुमित गिरफ्तार, जाएंगे जेल

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डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल की अप्राकृतिक मौत के मामले में शनिवार को पुलिस ने उनके पति डॉक्टर सुमित अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। रविवार को उन्हें जेल भेजा जाएगा। मुकदमे में नामजद ससुर डॉ. एससी अग्रवाल, सास अनीता अग्रवाल, जेठ डॉ. अमित अग्रवाल और जेठानी तूलिका अग्रवाल की भूमिका के संबंध में जांच जारी है। वहीं चर्चा है कि अन्य ससुरालीजनों को बचाने के लिए बड़े लोग पैरवी में कूद पड़े हैं। पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर दीप्ति के पिता ने आगरा वासियों से मांग की है कि उनकी बेटी को इंसाफ दिलाने में उनकी मदद करें। वे खामोश रहे तो मथुरा वासी अपनी बेटियों की शादी आगरा में नहीं करेंगे। 
डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल अपने पति डॉक्टर सुमित अग्रवाल के साथ विभव नगर स्थित विभव वैली व्यू अपार्टमेंट में रहती थीं। डॉ. सुमित अग्रवाल हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। प्रतापपुरा चौराहे के पास सफायर नाम से उनका नर्सिंग होम है। तीन अगस्त को डॉक्टर दीप्ति फंदे पर लटकी मिली थीं। पति ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया था। डॉक्टर दीप्ति को उसी रात फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पीटल में रैफर किया गया था। छह अगस्त की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया था। चार अगस्त को ताजगंज पुलिस और फोरेंसिक टीम ने फ्लैट में छानबीन की थी। वहां एक सुसाइड नोट मिला था। कोसी निवासी डॉक्टर नरेश मंगला ने बेटी की अप्राकृतिक मौत के बाद शुक्रवार को ताजगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में उन्होंने एक करोड़ अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित करने का आरोप  लगाया था। इस हाईप्रोफाइल मामले ने कोई आरोप लगने से पहले पुलिस सक्रिय हो गई। एसएसपी बबबू कुमार के निर्देश पर पुलिस ने डॉ. दीप्ति के पति डॉक्टर सुमित अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी की खबर सुनते ही परिजनों के होश उड़ गए। चर्चा है कि वे घबरा गए हैं। पुलिस के सामने तक नहीं आ रहे हैं। इंस्पेक्टर ताजगंज नरेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित डॉक्टर को रविवार को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

सात साल से पहले हुई है अप्राकृतिक मृत्यु

डॉक्टर दीप्ति की शादी तीन नवंबर 2014 को हुई थी। मतलब उनकी शादी को अभी सात साल पूरे नहीं हुए थे। पुलिस के पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट है। जिसमें स्पष्ट है कि उनकी मौत स्भाविक नहीं थी। पिता का आरोप है कि दहेज के लिए बेटी को प्रताड़ित किया जाता था। मुकदमे में कार्रवाई के लिए सिर्फ इन दो साक्ष्यों की जरूरत पड़ती है। लोग इसे दहेज हत्या बोलते हैं जबकि कानून की भाषा में इसे दहेज मृत्यु कहा जाता है। जरूरी नहीं है कि विवाहिता की हत्या की जाए। प्रताड़ित होकर विवाहिता अपनी जान खुद भी देती है तो यह दहेज मृत्यु की श्रेणी में आता है। साक्ष्य डॉक्टर दीप्ति के पिता के पक्ष में हैं। 
-रिटायर सीओ बीएस त्यागी

बहुत खतरनाक है आईपीसी की धारा 304 बी
दहेज मृत्यु की धारा में कार्रवाई के लिए पुलिस को सिर्फ दो साक्ष्य चाहिए। पहला शादी को सात साल पूरे नहीं हुए हों। मौत अप्राकृतिक हो। दूसरा दहेज की मांग की गई हो। इसके अलावा कार्रवाई के लिए किसी और साक्ष्य की जरूरत नहीं होती है। इस धारा के तहत मुकदमा दर्ज होने पर अभियोजन के दौरान आरोपित को दोषी मानते हुए सुनवाई होती है। बेगुनाही साबित करने का भार अभियुक्तों के ऊपर होता है। एविडेंस एक्ट में पुलिस उनकी बेगुनाही के साक्ष्य संकलित नहीं करती। दहेज मृत्यु का अपराध सिद्ध होने पर कम से कम सात साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
-वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा

लोग उनकी दुकान से मिठाइयां खा रहे हैं
डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल के पिता डॉक्टर नरेश मंगला का कहना है कि मथुरा वाले ऐसे नहीं हैं। उनके यहां आगरा की बेटी के साथ ऐसा हुआ होता तो वे सड़क पर आ जाते। प्रदर्शन करते। तब तक शांत नहीं बैठते जब तक बेटी को इंसाफ नहीं मिल जाता। आगरा वाले तो हत्यारोपियों की दुकान से मिठाइयां खरीदकर खा रहे हैं। इस जंग में उन्हें आगरा की जनता का साथ चाहिए। अपने पैसों और संबंधों के बूते पर बेटी के ससुरालीजन इस सनसनीखेज मामले को दबाने का प्रयास करेंगे। जनता उनके साथ होगी तो उनकी बेटी को इंसाफ मिलने से कोई नहीं रोक पाएगा।

सोशल मीडिया पर छाया मामला 
डॉ. दीप्ति की मौत के बाद फेसबुक पर कई महिला चिकित्सकों ने भावुक पोस्ट डालीं। दीप्ति मांगे न्याय टैग लाइन से डाली गईं ये पोस्ट बहुत शेयर हो रही हैं।  पोस्ट में हालातों का जिक्र करते हुए उनके तनाव के कारण भी लिखे हैं। डॉ. दीप्ति के व्यवहार, उनकी कार्यशैली के बारे में भी अपने विचार दिए हैं। पोस्ट पर लगातार कमेंट आ रहे हैं। यह प्रकरण अब सोशल मीडिया पर छा गया है।

जेठ अमित बोले आरोप निराधार हैं 
डॉ. दीप्ति के जेठ डॉ. अमित अग्रवाल ने शनिवार को अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि दीप्ति के पिता ने जो आरोप उनके परिवार पर लगाए हैं वे निराधार हैं। सितंबर 2018 से ही दीप्ति परिवार से अलग फ्लैट में रहने लगी थीं। हमारे यहां आना-जाना भी नहीं था। पांच जून को दीप्ति की बेटी का जन्मदिन था। तब उनके बच्चे वहां गए थे। वह अपने बच्चों को लेने गए थे। उसके बाद से उनके घर कोई गया तक नहीं था। फ्लैट में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उसकी जांच से यह पता चल जाएगा। दीप्ति के पिता ने दहेज मांगने और चेक से देने के आरोप लगाए हैं। ये भी गलत हैं।

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