मुर्गे वाली माता: किन्नर समुदाय की दिव्य आराध्या

Abhinav Tiwari

1. इष्ट देव-देवी: किन्नर समुदाय के प्रमुख इष्ट अर्धनारीश्वर और बहुचरा माता हैं। बहुचरा माता को प्रेमपूर्वक मुर्गे वाली माता भी कहा जाता है।

2. मुख्य मंदिर: गुजरात के मेहसाणा में बहुचरा माता का प्रमुख मंदिर स्थित है, जो किन्नरों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

3. अन्य देवी उपासना: कुछ किन्नर कामाख्या माता और काली माता की पूजा भी करते हैं। विशेष रूप से किन्नर अखाड़ों में देवी काली की आराधना होती है।

4. किन्नर अखाड़ा: यह अखाड़ा जूना अखाड़ा से जुड़ा है। 2015 में उज्जैन में इसकी स्थापना हुई और 2016 के कुंभ से इसकी आधिकारिक भागीदारी शुरू हुई।

5. धर्म ध्वजा: किन्नर अखाड़े की सफेद रंग की ध्वजा होती है, जिसके किनारे सुनहरे रंग के होते हैं। यह ध्वजा जूना अखाड़े के साथ फहराई जाती है।

6. नागा परंपरा में भिन्नता: किन्नर संत मुंडन नहीं कराते, बल्कि बालों की एक लट काटकर गंगा में प्रवाहित करते हैं।

7. धार्मिक मान्यता: 2019 प्रयागराज के अर्ध कुंभ में और 2021 हरिद्वार कुंभ में भाग लेकर किन्नर अखाड़ा आधिकारिक रूप से कुंभ का हिस्सा बन चुका है।

8. धार्मिक पहचान: यह अखाड़ा किन्नरों को धार्मिक और सामाजिक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

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