दवा में सुरक्षित पर खाने में ज़हरीला? एल्युमिनियम फॉइल की सच्चाई

Abhinav Tiwari

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एल्युमिनियम फॉइल में खाना रखना, विशेषकर गर्म या एसिडिक भोजन, शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, एल्युमिनियम का उपयोग दवाइयों की पैकिंग में सुरक्षित माना जाता है।

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गर्म या खट्टे खाने को एल्युमिनियम फॉइल में रखने से धातु के कण भोजन में मिल सकते हैं, जो शरीर में जाकर दिमाग और हड्डियों पर बुरा असर डाल सकते हैं।

अगर ओवन में फॉइल का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह टूटकर खाने में घुल सकता है। रिसर्च के अनुसार, एल्युमिनियम शरीर में जमा हो सकता है और यह न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।

थोड़ी मात्रा में एल्युमिनियम शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन अधिक मात्रा में यह नर्वस सिस्टम और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है।

वहीं, दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम सीधे दवा के संपर्क में नहीं आता। इसके अलावा, यह नमी, बैक्टीरिया और रोशनी से दवा को सुरक्षित रखने में मदद करता है। एल्युमिनियम एक बैरियर की तरह काम करता है, जो ऑक्सीजन और बैक्टीरिया को अंदर नहीं जाने देता।

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दवाओं की गोलियों और कैप्सूल पर पहले से ही एक सुरक्षात्मक कोटिंग होती है, जिससे एल्युमिनियम का सीधा संपर्क नहीं होता और यह शरीर में नहीं पहुंचता।

दवाओं की पैकिंग में एल्युमिनियम का उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है, और इसे FDA और WHO जैसी संस्थाओं की मंजूरी प्राप्त है।

इसलिए, गर्म या एसिडिक खाने को फॉइल में ज्यादा देर तक न रखें और ओवन में विशेष तापमान के लिए डिजाइन किए गए फॉइल का ही उपयोग करें। जहां तक दवाओं का सवाल है, एल्युमिनियम का संपर्क नहीं होता, इसलिए यहां कोई खतरा नहीं है।

खाने में सतर्कता जरूरी है, जबकि दवाओं की पैकिंग में कोई खतरा नहीं।

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