मुहम्मद शाह रंगीला और नादिर शाह की लूट और दिल्ली का खूनी इतिहास
Abhinav Tiwari
1. मुगल बादशाह की बेफिक्र जिंदगी 1719 में मुहम्मद शाह रंगीला मुगल साम्राज्य का शासक बना। पर, इस बादशाह ने युद्ध के बजाय मुर्गों की लड़ाई, संगीत, महफिलें और शराब में डूबा रहता था। कभी-कभी महिलाओं के कपड़े पहनकर नाचता था।
2. दिल्ली की समृद्धि और नादिर शाह की लालसा मुगल साम्राज्य काबुल से बंगाल तक फैला था, दिल्ली दुनिया का सबसे अमीर शहर था। ऐसे में ईरानी शासक नादिर शाह ने मुगलों की दौलत पर नजर गड़ाई और 36,000 सैनिकों के साथ दिल्ली पर हमले की योजना बनाई।
3. रंगीला का अहंकार और आक्रमण नादिर शाह के खतरों को नजरअंदाज करते हुए रंगीला ने चिट्ठी शराब में डुबो दी और कहा कि "हनूज दिल्ली दूर अस्त" (अभी दिल्ली बहुत दूर है)।
4. दिल्ली पर कब्जा और खूनी तांडव 9 मार्च 1739 को नादिर शाह ने बिना युद्ध के दिल्ली पर कब्जा कर लिया। वहीं अफवाह फैलने पर कि दिल्लीवासियों ने ईरानी सैनिकों पर हमला कर दिया है। बदले में नादिर शाह ने 30,000 निर्दोष लोगों का कत्लेआम करवाया।
5. दिल्ली की ऐतिहासिक लूट 58 दिन तक शहर को लूटा गया। 32 करोड़ रुपए, 1000 हाथी, कीमती जेवरात और कोहिनूर हीरा लूटा गया। 100 राजमिस्त्री और 200 बढ़ई भी ईरान ले जाए गए।
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6. कोहिनूर का सदा के लिए विदेश जाना नादिर शाह ने कोहिनूर हीरा ईरान ले जाकर भारत को इस ऐतिहासिक खजाने से वंचित कर दिया।
7. रंगीला का पतन और विरासत लूट के बाद नादिर शाह ने रंगीला को फिर गद्दी सौंपी, पर मुगल साम्राज्य की ताकत हमेशा के लिए खत्म हो गई। वहीं यह घटना मुगलों के पतन और भारत में विदेशी आक्रमणकारियों के लिए द्वार खोलने का प्रतीक बनी।
ऐसे में कहा जाए तो अहंकार और लापरवाही ने एक साम्राज्य को तबाह कर दिया। वहीं इतिहास की यह घटना आज भी नेतृत्व की जिम्मेदारी और सतर्कता की याद दिलाती है।