लखनऊ स्थित लोकबंधु अस्पताल में भर्ती मानसिक मंदित बच्चों का हाल जानने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने निर्वाण संस्था से लाए गए बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और एक-एक बच्चे के बेड तक जाकर उनकी हालत का जायजा लिया। मुख्यमंत्री बच्चों से मिलकर भावुक नजर आए।
चार दिन पहले 23 मार्च की रात निर्वाण संस्था में भोजन करने के बाद करीब 70 बच्चे अचानक बीमार पड़ गए थे। इनमें अब तक चार बच्चों की मौत हो चुकी है। 27 बच्चे अब भी इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से एक की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे आईसीयू में रखा गया है।
मुख्यमंत्री योगी ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स को निर्देश दिए कि बच्चों का इलाज पूरी गंभीरता से किया जाए और जब तक वे पूरी तरह स्वस्थ न हों, तब तक उन्हें डिस्चार्ज न किया जाए। साथ ही उन्होंने बच्चों के खाने-पीने और देखभाल की व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए।
सीएम के साथ इस दौरान प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव लीना जौहरी, मंडलायुक्त डॉ. रौशन जैकब, जिलाधिकारी विशाख जी, और अस्पताल के एमएस डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी सहित वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे।
एमएस डॉ. अजय त्रिपाठी ने बताया कि फूड पॉइजनिंग की वजह से बच्चों की हालत बिगड़ी। 16 बच्चों को लोकबंधु अस्पताल, तीन को बलरामपुर, और एक को केजीएमयू गांधी वार्ड में भर्ती कराया गया है। 7 बच्चों का इलाज अभी भी संस्था में ही चल रहा है।
पहली मौत 24 मार्च को 12 वर्षीय शिवांक की हुई थी, लेकिन इसे संस्था ने छिपा लिया। बाद में रेनू (15) और दीपा (15) की मौत हुई, जिसके बाद मामला उजागर हुआ। अब पता चला है कि सूरज (12) की भी 25 मार्च को बलरामपुर अस्पताल में मौत हो चुकी थी, जिसे छिपाने की कोशिश की गई।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि बच्चों की मौत की जांच के लिए डेथ ऑडिट करवाई जाएगी। इसके लिए डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई है जिसमें डॉ. अरुण तिवारी, डॉ. पीसी तिवारी और डॉ. सबीह मजहर शामिल हैं। कमेटी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य पहलुओं की जांच करेगी।
बुद्धेश्वर, पारा इलाके में स्थित निर्वाण आश्रय केंद्र पीपीपी मॉडल पर चलता है, जहां 147 मानसिक मंदित, अनाथ और बेसहारा बच्चों को रखा गया है। यहां रहने वाले बच्चों की उम्र 10 से 18 साल के बीच है।