लखनऊः प्रदेश के कुछ जनपदों में एसएसपी से डीआईजी के पद पर प्रोन्नत होने के बाद पुलिस अधिकारियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि उनके द्वारा वर्तमान समय में जनपदों में एसएसपी/एसपी/डीसीपी के पद पर कार्य किया जा रहा है और डीआईजी के पद पर प्रोन्नत होने के बाद जनपदों में अभी भी एसएसपी/एसपी/डीसीपी के पद पर कार्य किया जा रहा है। उनके द्वारा डीआईजी पद पर प्रोन्नत होने के कारण अपनी सरकारी गाड़ी में एक स्टार लगाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, जो डीआईजी पद के लिये अनुमन्य है।
डीआईजी पद पर प्रोन्नत होने के बाद भी जनपदों में विगत तीन माह से एसएसपी/एसपी/डीसीपी के पद पर कार्य किया जा रहा है। कभी-कभी जनपदों में डीआईजी रेंज होने का भ्रम भी बना हुआ है। जबकि डीआईजी रेज अलग से कार्य कर रहे हैं। इससे अत्यंत ही भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आखिर प्रदेश का गृह विभाग इनको डीआईजी के पद पर तैनाती क्यों नहीं दे रहा है या फिर सरकार की यह इच्छा है कि वह डीआईजी रहते हुये एसएसपी/एसपी/डीसीपी के पद पर कार्य करते रहे।
प्रदेश के गृहमंत्रालय के अधीन कई ऐसे आईपीएस अफसर हैं, जो महत्वहीन पदों एवं प्रतीक्षा सूची में हैं। उनकी एक लंबी फेहरिस्त है मथुरा, झांसी, नोएडा, फतेहगढ़( फ़र्रूख़ाबाद)। आखिर प्रदेश का गृह विभाग डीआईजी के पद पर इनकी तैनाती क्यों नहीं कर पा रहा है? जबकि प्रोन्नति हुये लगभग तीन माह हो चुके हैं।