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Bareilliy’s Kalibari: जहां नारियल चढ़ाने से पूरी होती है हर मन्नत, महाष्टमी पर उमड़े हजारों श्रद्धालु

बरेली के कालीबाड़ी में स्थित मां काली मंदिर में नारियल चढ़ाने से पूरी होती है हर मन्नत। जानिए इस 300 साल पुराने मंदिर का इतिहास, मान्यताएं और नवरात्रि पर भक्तों की आस्था।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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Bareilliy’s Kalibari: जहां नारियल चढ़ाने से पूरी होती है हर मन्नत, महाष्टमी पर उमड़े हजारों श्रद्धालु

बरेली के दिल में स्थित एक ऐसा मंदिर, जो सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि चमत्कारों का गवाह भी है। हम बात कर रहे हैं कालीबाड़ी मुहल्ले में स्थित मां काली के प्राचीन मंदिर की, जहां मान्यता है कि नारियल चढ़ाने मात्र से हर मुराद पूरी हो जाती है। नवरात्रि के महापर्व विशेषकर महाष्टमी पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

मंदिर का इतिहास और स्थापना

कहा जाता है कि यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है और इसकी स्थापना एक बंगाली परिवार द्वारा की गई थी। कोलकाता से लायी गई मूर्ति को यहां स्थापित किया गया था। स्थानीय लोग इस मूर्ति को लाने वाले संत को “बंगाली बाबा” या “महादेव” के नाम से जानते हैं। मंदिर के आस-पास का क्षेत्र पहले घने जंगल से घिरा हुआ था।

मां काली की विशेष उपासना

मां काली, जो शक्ति और विनाश की देवी के रूप में पूजी जाती हैं, इस मंदिर में विशेष रूप से शनिवार और नवरात्रि के दौरान आराध्य बनती हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां आकर सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती।

नारियल चढ़ाने की परंपरा

इस मंदिर की एक खास परंपरा है — मां को नारियल चढ़ाना। मान्यता है कि यहां नारियल चढ़ाने से संतानहीन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होता है। कई ऐसे उदाहरण हैं जहां डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, लेकिन मां काली की कृपा से उन्हें संतान का आशीर्वाद मिला।

नवरात्रि में भव्य आयोजन और श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्रि के दौरान मंदिर को विशेष श्रृंगार, दीप सज्जा, और भजन-कीर्तन से सजाया जाता है। महाष्टमी के दिन मंदिर में हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। दूर-दराज से लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। शनिवार को विशेष रूप से दीपक जलाना और नारियल चढ़ाना भक्तों के बीच लोकप्रिय परंपरा है।

कालीबाड़ी: मंदिर से पड़ा मोहल्ले का नाम

इस मंदिर की लोकप्रियता इतनी है कि पूरे मोहल्ले का नाम ही “कालीबाड़ी” पड़ गया। यह क्षेत्र अब बरेली की पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। मंदिर के पुजारी और स्थानीय निवासी इसे “अलौकिक शक्तियों का केंद्र” मानते हैं और यहां आए अनेक भक्त चमत्कारिक अनुभवों की बातें साझा करते हैं।

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