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Chaitra Navratri 2025 Day 5: मां स्कंदमाता की पूजा आज, जानें विधि, मंत्र, भोग, शुभ रंग और कथा

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की होती है आराधना, संतान सुख और समृद्धि की करती हैं कृपा...

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
Updated:
Chaitra Navratri 2025 Day 5: मां स्कंदमाता की पूजा आज, जानें विधि, मंत्र, भोग, शुभ रंग और कथा

चैत्र नवरात्रि 2025 का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष 3 अप्रैल 2025, गुरुवार को नवरात्रि का पांचवा दिन है, और इस दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता को करुणा और मातृत्व की देवी माना जाता है। वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति और संतान सुख प्रदान करती हैं।

मां स्कंदमाता का स्वरूप

  • स्कंदमाता की चार भुजाएं होती हैं।
  • दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में लिए होती हैं।
  • दाहिनी निचली भुजा में कमल पुष्प सुशोभित होता है।
  • बाईं ऊपरी भुजा वरमुद्रा में होती है, और निचली भुजा में भी कमल होता है।
  • मां शेर की सवारी करती हैं और उनकी मुद्रा सदा शांत, सौम्य और वात्सल्य से परिपूर्ण रहती है।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि (Puja Vidhi)

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और मां स्कंदमाता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3. मां को रोली, अक्षत, कुमकुम, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।

4. केले का भोग लगाएं क्योंकि यह मां स्कंदमाता का प्रिय भोग है।

5. नीचे दिए गए मंत्रों का जप करें और आरती उतारें।

6. पूजा के बाद परिवारजनों के बीच प्रसाद वितरित करें।

मां स्कंदमाता का मंत्र

सामान्य पूजा मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

ध्यान मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां स्कंदमाता का भोग

  • मां को केला अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • केले का भोग संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-समृद्धि में सहायक होता है।
  • नवरात्रि का पांचवां शुभ रंग
  • इस दिन पीला और सफेद रंग शुभ माना जाता है।
  • पूजा के दौरान इन रंगों के वस्त्र पहनना या इन्हें पूजा में सम्मिलित करना विशेष फलदायक होता है।

मां स्कंदमाता की कथा (Skandmata Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तारकासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर एक विशेष वरदान प्राप्त किया था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता है। तारकासुर ने सोचा कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे, इसलिए वह अमर रहेगा। इसी विश्वास के साथ वह देवताओं पर अत्याचार करने लगा।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने पार्वती जी से विवाह किया और भगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म हुआ। स्कंदमाता ने उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण दिया और आगे चलकर कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया। इस प्रकार मां स्कंदमाता को मुक्ति, शौर्य और मातृत्व की प्रतीक माना गया।

मां स्कंदमाता की आराधना के लाभ

  • संतान सुख की प्राप्ति
  • मानसिक और पारिवारिक शांति
  • रोग, शोक और बाधाओं से मुक्ति
  • जीवन में करुणा, धैर्य और समृद्धि का वास

Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक स्रोतों पर आधारित है। कृपया इसे केवल श्रद्धा और संस्कृति की दृष्टि से लें। किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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