उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ 2025 के आयोजन से होने वाले आर्थिक प्रभावों के अध्ययन की पहल शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन से प्रदेश में किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियां सक्रिय होती हैं, और उन्हें विकास की दीर्घकालिक योजनाओं में कैसे शामिल किया जा सकता है।
स्थानीय निकाय निदेशालय ने प्रदेश के 11 प्रमुख जिलों से दिसंबर 2024, जनवरी और फरवरी 2025 के आर्थिक आंकड़े एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। जिन जिलों से जानकारी मांगी गई है, वे हैं:
🔹प्रयागराज (महाकुंभ नगर)
🔹वाराणसी
🔹अयोध्या
🔹लखनऊ
🔹मथुरा
🔹मीरजापुर
🔹सोनभद्र
🔹चित्रकूट
🔹आगरा
🔹सीतापुर
इन जिलों में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण महाकुंभ के समय व्यापक आर्थिक हलचल देखने को मिलती है, जिसे सरकार संस्थागत आंकड़ों के माध्यम से समझना चाहती है।
इस अध्ययन का उद्देश्य सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश में महाकुंभ जैसे आयोजनों से प्रेरित आर्थिक गतिविधियों की पहचान कर राज्य सरकार उन्हें विकास की रणनीति में शामिल करेगी। इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन, ट्रांसपोर्ट, हॉस्पिटैलिटी, और सेवा क्षेत्रों को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
🔹होटल और लॉजिंग सेक्टर में वृद्धि
🔹खुदरा और थोक व्यापार में इजाफा
🔹पर्यटन से जुड़ी सेवाओं में रोजगार सृजन
🔹परिवहन सेवाओं का विस्तार
🔹स्थानीय हस्तशिल्प, उत्पादों की बिक्री
🔹राजस्व संग्रहण में वृद्धि
महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी महोत्सव बन चुका है। इसमें करोड़ों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं, जिससे स्थानीय और राज्य स्तर पर व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलती है। यह अध्ययन प्रदेश सरकार को इन अवसरों का दीर्घकालिक लाभ उठाने में सहायता करेगा।